हरियाणा के गुरुग्राम जमीन घोटाले में रोबोट वाढेरा समेत सभी आरोपी 16 मई को अदालत में तलब
5000 करोड़ के इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी आरोपी

सत्य खबर हरियाणा
Gurugram Land Scam : दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को गुरुग्राम के चर्चित शिकोहपुर भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा और अन्य के खिलाफ दायर आरोप पत्र (चार्जशीट) पर संज्ञान लेते हुए सभी 9 आरोपियों को समन जारी किया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 16 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।अदालत में सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा के वकीलों ने कोर्ट से अपील की थी कि ईडी द्वारा पेश की गई चार्जशीट पर संज्ञान न लिया जाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने दस्तावेजों और सबूतों को देखने के बाद इसे सुनवाई के योग्य माना और वाड्रा समेत सभी नौ नामजद आरोपियों को पेशी का आदेश सुना दिया।

क्या है मामला
बता दें कि ये मामला हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर में जमीन खरीद-बिक्री के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस जमीन सौदे में भारी वित्तीय हेराफेरी की गई है। एजेंसी ने लंबी जांच के बाद 17 जुलाई 2025 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। अब कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद इस हाई-प्रोफाइल केस में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
इस केस में वाड्रा के साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी आरोपी हैं। उन पर आरोप है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने वाड्रा की कंपनी को मुनाफा पहुंचाया। 2008 में हुआ जमीन का सौदा फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। उसी साल, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुआई वाली हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर 2.7 एकड़ के लिए व्यवसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस दिया। इसके बाद कॉलोनी बनाने की जगह स्काईलाइट कंपनी ने इस जमीन को DLF को 58 करोड़ रुपए में बेच दिया, जिससे लगभग 50 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।
IAS अधिकारी ने म्यूटेशन रद्द किया 2012 में, तत्कालीन हरियाणा सरकार के भूमि रजिस्ट्रेशन निदेशक अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं का हवाला देते हुए जमीन के म्यूटेशन (स्वामित्व हस्तांतरण) को रद्द कर दिया। खेमका ने दावा किया था कि स्काईलाइट को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ, और सौदा संदिग्ध था। इसके बाद, उनका तबादला कर दिया गया, जिससे यह मामला और विवादास्पद हो गया। 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र हुड्डा, DLF, और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की थी। जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में IPC की धारा 420, 120, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में IPC की धारा 423 के तहत नए आरोप जोड़े गए थे।
जमीन की यह डील जब हुई, उस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। जमीन खरीदने के करीब एक महीने बाद हुड्डा सरकार ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को इस जमीन पर आवासीय परियोजना विकसित करने की परमिशन दे दी। आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन के दाम बढ़ जाते हैं।
लाइसेंस मिलने के मुश्किल से 2 महीने बाद ही, जून 2008 में, डीएलएफ वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से यह जमीन 58 करोड़ में खरीदने को तैयार हो जाती है। यानी मुश्किल से 4 महीने में 700 प्रतिशत से ज्यादा का मुनाफा वाड्रा की कंपनी को होता है। 2012 में हुड्डा सरकार कॉलोनी बनाने वाले लाइसेंस को DLF को ट्रांसफर कर देती है।
ED ने FIR के आधार पर जांच शुरू की इसके बाद ईडी ने संदेह जताया कि इस सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग हुई, क्योंकि जमीन की कीमत कुछ ही महीनों में असामान्य रूप से बढ़ गई। इसके अलावा यह भी संदेह जताया कि ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज एक फर्जी कंपनी थी। उसे सौदे में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया।
जमीन की खरीद से जुड़ा चेक कभी जमा नहीं किया गया। ईडी ने 2018 में हरियाणा पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। यह जांच स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय गतिविधियों और सौदे से प्राप्त आय पर केंद्रित है।
ईडी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की वित्तीय लेनदेन, जमीन की खरीद-बिक्री, और DLF के साथ सौदे की जांच कर रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस सौदे से प्राप्त आय का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया गया। आरोप है कि DLF को इस सौदे में फायदा पहुंचाने के लिए हुड्डा सरकार ने नियमों का उल्लंघन किया। इसमें वजीराबाद में DLF को 350 एकड़ जमीन आवंटन का भी जिक्र है, जिससे डीएलएफ को कथित तौर पर 5,000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।
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